कितनी मुश्किल, कितने कंटक खड़े करेगा दुश्मन
हर बाधा हम दूर करेंगे, जीतेगा ये जीवन
माटी अपनी फौलादी है, जज्बा अपना इस्पाती
मिट जाएंगे पर नहीं झुकेंगे, देश है अपनी थाती
उजड़ी कोखें, सूनी मांगें, बहनों के पसरे हाथ
करें सवाल यही वो हरदम, कब होगा इंसाफ़
नापाक पड़ोसी होश में आए, आंखें अपनी खुली हुईं
रक्षा की खातिर न्योछावर कर देंगे ये तन-मन...
