कौन-सी थी वो ज़ुबान / जो तुम्हारे कंधे उचकाते ही / बन जाती थी / मेरी भाषा / अब क्यों नहीं खुलती / होंठों की सिलाई / कितने ही रटे गए ग्रंथ / नहीं उचार पाते / सिर्फ तीन शब्द

मुसाफ़िर...

Showing posts with label नमक. Show all posts
Showing posts with label नमक. Show all posts

Monday, November 10, 2008

नमकीन फिल्में

नमक
मुंह में भर देता है नमकीन स्वाद
और हाथों में?
फालतू बात नहीं है यह
नमक बनाने वाले हाथों में हो जायें ज़ख्म
तो फिर?, जलेंगे ना वो पोर-पोर?
नहीं, उनके ज़ख्म नहीं जलते
घावों में नमक असर नहीं कर पाता
सुना है
नमक बनने वाले अब अपने ज़ख्म सी चुके हैं
देर रात उन्हें सीडी पर दिखाई जाती हैं
नमकीन फिल्में