कौन-सी थी वो ज़ुबान / जो तुम्हारे कंधे उचकाते ही / बन जाती थी / मेरी भाषा / अब क्यों नहीं खुलती / होंठों की सिलाई / कितने ही रटे गए ग्रंथ / नहीं उचार पाते / सिर्फ तीन शब्द

मुसाफ़िर...

Monday, July 19, 2010

अरबों डॉलर की मालकिन वेबसाइट्स



फोर्ब्स हर साल देश के चुनिंदा अमीर लोगों की सूची छापता है...इनमें ज्यादातर आईटी वाले होते हैं। उनके पास इतना धन है, जो आंखें चुंधिया देता है...लेकिन उनसे भी ज्यादा कमाई करती हैं वेबसाइट्स। हाल में आई टॉप 30 वेबसाइट्स की लिस्‍ट में कुछ साइट्स की सालाना कमाई तो इतनी ज्यादा है, जितना एक देश का कुल बजट नहीं होता। अफ़सोस की बात बस इतनी है कि इन वेबसाइट्स में अपने देश से एक भी नहीं है। इनमें अव्वल नंबर पर है—गूगल और आख़िरी पायदान पर एनवाई टाइम्स मौजूद है। वर्चुअल वर्ल्ड का हीरो नंबर एक गूगल हर सेकेंड 691.27 डॉलर अपनी तिज़ोरी में कैद कर लेता है, जबकि इसकी सालाना आय है 21 अरब 80 करोड़ डॉलर...रुपये में इसे पचास से गुणा करने पर कितनी रकम सामने आएगी?  रहने दीजिए, आंखें खुली रह जाएंगी और गिनती करते-करते अंगुलियां थक जाएंगी... लैरी पेज और सेर्जी ब्रिन की ओर से शुरू किए गए गूगल के बाद अगला नंबर है Amazon का, इसकी वार्षिक आय है 19,166,000,000। उफ!  इतने ज़ीरो! तीसवीं पायदान पर है—हेनरी जेर्विस रेमंड का एनवाई टाइम्स। प्रति सेकेंड इसकी आय है महज 5.55 डॉलर, जबकि सालाना इसके खाते में भी 175,000,000 डॉलर आ जाते हैं। इस सूची में याहू, ई बे, एमएसएन लाइव, पे पल, आई ट्यून्स, रायटर्स, प्राइसलाइन, एक्सपेडिया, नेट फ्लिक्स, ट्रैवलोसिटी, जैपोज़, होटल्स.कॉम, एओएल, ओर्बिज, ओवरस्टॉक, माई स्पेस, स्काइप, सोहू, Buy.com, रॉब ब्रोक, स्टबहब, अलीबाबा, ब्ल्यू नाइक और ट्राइपाडवाइजर, गेटी इमेजेज और बिड्ज जैसी साइट्स शामिल हैं। नहीं...नहीं, हैरान होने की ज़रूरत नहीं। फेसबुक और यू ट्यूब जैसी हर दिल अजीज वेबसाइट्स भी इस सूची का हिस्सा हैं, लेकिन वो काफी निचली पायदान पर हैं। जैसे 24 वीं सीढ़ी पर मौजूद चेहरों की किताब, बोले तो—फेसबुक हर सेकेंड महज 9.51 डॉलर की कमाई करती है, वहीं यू ट्यूब की सालाना आय 300,000,000 डॉलर है।
(जयपुर के हिंदी अखबार डेली न्यूज़ के साप्ताहिक सप्लिमेंट हम लोग में प्रकाशित आलेख... मूल है यहां... http://www.dailynewsnetwork.in/news/humlog/18072010/Humlog-Article/14417.html)

6 comments:

Vivek Rastogi said...

पता नहीं कितने और वर्ष हमें इसके लिये इंतजार करना पड़ेगा।

अविनाश वाचस्पति said...

कहीं हमारा भी जिक्र कर दिया होता
अरबों डॉलर के न सही
सैकड़ों पाठक हमारे मालिक तो हैं

प्रेम said...

अच्छी जानकारी। पर इसमें किसी भारतीय वेबसाइट्स का न होना दुखद है।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

ब्लागिंग के बेताज शहंशाह का जिक्र हम कर तो रहे है!
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अविनाश वाचस्पति!
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अविनाश वाचस्पति!
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अविनाश वाचस्पति!

काजल कुमार Kajal Kumar said...

इनको मेरी नज़र लग जाए :)

Shawbhik said...

इस सूची में किसी भारतीय वेबसाइट का ना होना दुखद अवश्य है...पर मै दावे के साथ कह सकता हूँ कि इन सभी वेबसाइट्स में शायद ही कोई ऐसा होगा, जिसको बनाने और विकसित करने में किसी भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर या आई टी प्रोफेशनल का योगदान न रहा हो...फ़िलहाल हमें इसी में संतोष करना होगा.