कौन-सी थी वो ज़ुबान / जो तुम्हारे कंधे उचकाते ही / बन जाती थी / मेरी भाषा / अब क्यों नहीं खुलती / होंठों की सिलाई / कितने ही रटे गए ग्रंथ / नहीं उचार पाते / सिर्फ तीन शब्द

मुसाफ़िर...

Monday, April 19, 2010

अविनाश वाचस्पति रहे पुकार...कहां हो प्यारे टाटा जी




चौराहा पर पहली बार...किसी और की...(नहीं तो, ये अपने ही हैं...) अविनाश वाचस्पति जी की रचना....

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टाटा मोटर्स की इंडिका धोखे से पुराना मॉडल दे दिया गया : खरीदने से अब तक कर रही है लगातार परेशान (माननीय रतन टाटा जी से विनम्र अनुरोध)


मैंने 14 मार्च 2008 को मैसर्स विवेक ऑटोमोबाइल्‍स, करौल बाग से टाटा इंडिका जीएलजी DL 3C AY 5018 की खरीद की थी परन्‍तु मुझे बिना मेरी जानकारी में लाए वर्ष 2007 में निर्मित कार दे दी गई। जिस दिन से कार शो रूम से लेकर चला हूं तभी से तंग कर रही है। विवेक ऑटोमोबाइल्‍स के श्री दिनेश चावला ने कई बार मांगने के बाद भी पूरा भुगतान लेने पर भी ब्‍यौरेवार पूरा विवरण नहीं दिया। कार के साथ नंबर प्‍लेट भी नहीं दी गई जबकि उसके चार्जिस ले लिए गए। मैंने ट्यूबलैस टायर लगवाने के लिए कहा, जिसका अंतर 3000/- रुपये तो लिए गए परन्‍तु उनकी कोई रसीद नहीं दी गई। इस बारे में मैंने कई बार श्री दिनेश चावला को फोन पर भी कहा है और ई मेल भी भेजी हैं परन्‍तु उन्‍होंने आश्‍वासनों के अतिरिक्‍त कुछ नहीं किया। कार की डिलीवरी लेने से एक दिन पहले भी मैंने उन्‍हें ई मेल भेजी थी कि क्‍या इंडिका जीएलजी पेट्रोल वर्जन में सीएनजी किट लगवाने पर समस्‍या आती है तो उन्‍होंने इस संभावना को सिरे से ही नकार दिया। जबकि कार मुझे लेने के दिन से पेट्रोल पर और सीएनजी लगवाने पर (जब तक किट बदलवाकर दूसरी स्‍वीकृत सीक्‍वल किट नहीं लगवाई गई), इसका इंजन भी एक बार बदल चुका है, कभी स्‍टार्टिंग में परेशानी सेल्‍फ संबंधी, कभी सर्विसिंग में लापरवाही (कुल मिलाकर मेरी परेशानियों में दिनोंदिन इजाफा) अब तक बेसाख्‍ता परेशान कर रही है। इस बारे में पूरे इतिहास की आप जांच करवा सकते हैं।
नई कार जिस सुकून और आराम के लिए ली जाती है, वो तो मुझे नसीब ही नहीं हुआ है। बनिस्‍बत इसके मेरे जीवन में इसके आने से परेशानियों का अंबार लग गया है। जिससे राहत के लिए मैंने कई बार टाटा मोटर्स के कस्‍टमर केयर को ई मेल से सूचनाएं दी हैं। कंपनी के अधिकारियों से मिलने पर भी कई बार अनुरोध किया है परन्‍तु नतीजा वही ढाक के तीन पात। आप तक पहुंचने के लिए न तो मुझे ई मेल पता ही दिया गया और न ही मेरी समस्‍या आप तक पहुंच सकी है। मजबूर होकर मुझे सार्वजनिक मंच पर अपनी बात रखनी पड़ी है।
अब इन समस्‍याओं से आजिज आकर मैं अपनी समस्‍या सार्वजनिक कर रहा हूं। जिससे मेरी पुकार आप तक पहुंच सके और मुझे मेरी राशि हर्जाने सहित वापिस मिल सके। मुझे पूरा विश्‍वास है कि आप सत्‍य और न्‍याय पर अमल करते हैं। सफलता हासिल करने के लिए जिन खासियतों की इंसान को जरूरत होती है, वे सब आप में हैं। पूरी जानकारी के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कीजिएगा
माननीय रतन टाटा जी से अनुरोध कि टाटा मोटर्स की इस खराब कार के मामले में हस्‍तक्षेप करने का कष्‍ट करें ?
इस संबंध में पाठक अपनी राय उपर वाले लिंक पर क्लिक करके दे सकते हैं।

4 comments:

संजय भास्कर said...

बढ़िया प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई.
ढेर सारी शुभकामनायें.

संजय कुमार
हरियाणा
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

Udan Tashtari said...

उपभोक्ता फोरम में भी तुरंत केस दायर करिये और लीगल नोटिस भिजवाईये. ग्राहक की आवाज सुनना ही होगी.

ajit gupta said...

एक ही मार्ग - उपभोक्‍ता मंच।

राजू मिश्र said...

शोरूम बंद हो चुका है या खुला है... टाटा कम्‍पनी तो चल ही रही है।अविनाश जी तंग आ चुके हैं इस कार से ...श्री रतन टाटा जी को एक नई कार तत्‍काल मुहैया करा देनी चाहिए।